आप बीति 06-05-2020
हेलो Everyone कैसे हो यार तुम लोग उम्मीद करता हु सब कुशल मंगल होगा,
आज मैं एक बात तुम लोगो से share करना चाहता हु बहोत पुरानी एक कहावत हैं /// शायद किसी ने सच ही कहा हैं की ज़माने से जुदा जिनका कोई काम होता हैं, ज़माने भर में अक्सर उन्ही का तो नाम होता हैं... यार मेरा एक दोस्त हैं, संजय पता नहीं उसके दिमाग मैं क्या आया वो मुझसे बैठे बैःते मुझसे कहने लगा यार नितेश क्या हमारी ज़िंदगी ऐसी तरह मजदूरों की तरह कट जायगी?? आखिर कब तक चलेगा ये सब। ....
मैंने भी बोला यार बात तो तेरी सही हैं, अगर ज़िंदगी बदलनी हैं तो कुछ तो करना ही पड़ेगा सोचते हैं कुछ, लेकिन अभी मुझे देर हो रही हैं अभी मैं चलता हु.. ये कहकर मैं वहा से चला गया!!
कुछ दिन तो सब वैसे ही अच्छा खासा चल रहा था लेकिन कुछ दिन बाद मैंने महसूस किया की यार कुछ तो हैं, मेरे दोस्त संजय का "नेचर" व्यवहार में बदलाव आ रहा था वो अलग अलग सा रहने लगा था, बातें काम करने लगा था मुझसे, सुबह जब मेरे पास आता तो उसकी आखो को देखकर ये अहसास होता था , जैसे वो रात भर से सोया नहीं हैं, उसकी सेहत में भी गिरावट आते जा रही थी , मैंने कई बार पूछा की यार संजय बात क्या हैं आखिर क्यू ऐसा उखड़ा उखड़ा सा रहता हैं, तो वो कोई जवाब ही नहीं देता, बस इतना कहता की कुछ नहीं मैं बस बदलाव चाहता हु इसलिय ऐसा होता जा रहा हु !
मैं जब भी उससे इस बदलाव की वजह पूछता तो उसको अच्छा नहीं लगता था इसलिय मैंने भी उससे बार बार पूछना बंद कर दिया था। .... मैंने सोचा यार जो होगा देखा जायगा जब संजय का मन करेगा मुझे कुछ बताने का तो वो खुद ही बता ;देगा मुझे। ....... और ऐसा ही चलता रहा कुछ महीने तक वो चुप चाप सा रहता लेकिन में वजह नहीं पूछता था हमेशा की तरह मैं इंतज़ार कर रहा था संजय का। .. लेकिन उस दिन मैंने क्या देखा की संजय नहीं उसकी जगह कोई और आया था। .... मैंने उस व्यक्ति से पूछा की तुम कोन हो भाई। .. आज संजय नहीं आया कहा हैं वो ??????????????
उस नए व्यक्ति ने बोला संजय ?? वो तो मालिक हैं भला वो यहाँ क्यो आने लगे और अगर वो काम करेंगे तो मुझे तो तुम्हे पैसे क्यो देंगे..
संजय और मालिक। ... ये सुन कर मुझे मेरे कानो पैर भरोसा नहीं हुआ कल तक जो इंसान मेरे साथ काम करता था जो मेरा दोस्त था, ऐसा क्या हुआ की रातो रात वो नौकर से मालिक बन गया। ..
उस नए व्यक्ति ने मुझे कहा की देखो तुम मेरा समय नस्ट मत करो चल कर काम करो वरना सारा समय बातो मैं ही निकल जायगा,, इतना कहकर वो अपना काम करने लगा , लेकिन "नितेश" मतलब मुझे इस बात से संतोष नहीं हो रहा था की आखिर बात क्या हैं मैंने उस दिन का अपना काम ख़त्म किया और मैं संजय से मिलने चला गया! जब मैं संजय के पास पंहुचा तो मैंने क्या देखा की की संजय कुछ मजदूरों को पैसे दे रहा था,
मैं उसके पास गया और उससे कहा की यार संजय कैसे हो ?
संजय मुझे यानि "नितेश" को देखकर बहोत खुश हुआ उसने मेरा हाथ पकड़ा और जहा वो दुसरो नोकरो को पैसे दे रहा था मुझे भी वही दुकान के अंदर लेकर गया दूकान मैं राखी मिठाई मुझे देकर मुह्ह मीठा करने को कहा, और कहने लगा देखो मैंने कहा था न मैं की मैं बदलाव चाहता हु आ गया हैं वो बदलाव। ..
मैंने उससे पूछा की यार तुम तो मेरे साथ ही काम करते थे, फिर ये सब कैसे हुआ ???
उसने मुझसे बहोत ही गहरी बात कही की नितेश "आसमान से तारे तोड़ने के लिए जरूरी हैं हम आसमान मैं पहुंचे अगर तारे हम पर खुद गिरे तो वो हमें ही ख़त्म कर देंगे"मैंने बहोत अचंभित "Surprisely" होकर उससे पूछा की की मैं तुम्हारी बातो को समझा नहीं तुम कहना क्या चाहते हो। .....??
तब संजय ने मुझे बड़े ही सहज स्वभाव से कहा की अगर हम अपनी ज़िंदगी बदलते हैं तो उसे हम अपने नियंत्रण मैं रख सकते हैं, लेकिन अगर कोई व्यक्ति बदलाव लाता हैं तो हमें बर्बाद भी कर सकता हैं...
मैंने संजय से साफ़ साफ़ पूछा की आखिर बात क्या हैं इतना क्यू घुमा रहे हो बातो को माज़रा क्या हैं आखिर बताते क्यू नहीं ? तब कही जाकर संजय कहा की जब हम पत्थर तोड़कर शिल्पकार को देते है तो उससे वो शिल्पकार मूर्ति बनाता हैं, और हमसे ज्यादा पैसे कमाता हैं, तो मैंने भी मूर्ति बनाना सीखा और धीरे धीरे अपना व्यवसाय शुरू किया !
लेकिन उसने मुझसे कहा की तू अपना काम करता कब था, तुझे याद हैं की मेरी सेहत गिरते जा रही थी मेरा व्यवहार बदला बदला सा था यही वो कारन था जब सब गहरी नींद मैं सो जाते थे तब मैं मूर्ति सीखने मैं दिन रात एक कर देता था ,,, दिन में , मैं पत्थर तोड़ता और रात मैं मूर्ति बनाना सीखता ,, आज भगवन की दया से मैंने ये दूकान खोल ली हैं
तब मुझे मेरे दोस्त संजय की बात समझ मैं आई और मैंने अपने दोस्त से कहा की सुच कहते हैं दोस्त की चैन की नींद पानी हैं तो रातो को जागना ही पड़ेगा सिर्फ सोचने से कुछ नहीं होगा सोच हकीकत मैं तब ही बदलेगी जब हम अपनी सोच पैर काम करना शुरू कर देंगे ,
फिर मैंने भी मेहनत करना शुरू की या यू कहे की सही दिशा मैं मेहनत करना शुरू की। .
यार एक बात समझ मैं आई की हमारे आसपास भी कुछ लोग हैं जो सिर्फ सोचते हैं करते नहीं हैं सफलता प्राप्त हो उसके लिए सही प्रयास नहीं करते ,
मैं तो आप लोगो से बस यही कहूंगा दोस्तों की यदि आपके अंदर कोई गुन कोई कला हैं तो अपने जीवन को सफल बनाने के लिए प्रयोग मैं लाय।
और यही कोई ऐसा गुन नहीं हैं तो अपने अंदर कोई ऐसा गुन विकसित करे , सफलता बस आपसे 2 कदम की दुरी पर खाड़ी हैं सही दिशा मैं मेहनत कीजिय और अपने जीवन को सफल बनाइये। ......
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